तेलंगाना के मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy ने डिलिमिटेशन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर यदि दक्षिण भारत के राज्यों के साथ राजनीतिक असमानता की जाती है, तो इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
रेड्डी ने साफ कहा कि इस तरह के संवेदनशील फैसले बिना सभी पक्षों की सहमति के लिए गए तो यह देश की एकता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि Indian National Congress पूरी तरह इसके समर्थन में है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में पार्टी का ऐतिहासिक योगदान रहा है—चाहे वह मतदान का अधिकार हो या स्थानीय निकायों में आरक्षण।
हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण की आड़ में लोकसभा सीटों के पुनर्गठन, यानी Delimitation in India, के जरिए दक्षिण भारत के राज्यों की राजनीतिक ताकत को कम करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि यदि सीटों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो उत्तर और दक्षिण भारत के बीच प्रतिनिधित्व में असंतुलन और बढ़ जाएगा।
रेड्डी ने आर्थिक असमानता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के राज्य केंद्र को अधिक टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें अपेक्षाकृत कम संसाधन मिलते हैं। ऐसे में अब राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भी कटौती की आशंका चिंता का विषय है।
इस स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने डिलिमिटेशन के लिए एक “हाइब्रिड मॉडल” अपनाने का सुझाव दिया। उनके अनुसार, 50 प्रतिशत सीटों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर और शेष 50 प्रतिशत राज्यों के आर्थिक योगदान (GSDP) के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मुद्दे पर सभी राज्यों, राजनीतिक दलों और विधानसभाओं में व्यापक चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि देश में संतुलन और समानता बनी रहे।
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