मिर्जापुर जिले में गौवंशों के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग ने ‘भूंसा बैंक’ योजना की शुरुआत की है। इस पहल का मकसद पूरे वर्ष गौशालाओं और आश्रय स्थलों में चारे की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. भूपेंद्र कुमार ने किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों से निकलने वाले भूंसे को जिले से बाहर न भेजें, बल्कि उसे स्थानीय भूंसा बैंक में जमा करें या उचित मूल्य पर वहीं बेचें। विभाग का कहना है कि इससे गौवंशों के चारे की समस्या काफी हद तक कम हो सकेगी।
जिले में फिलहाल 49 गौ आश्रय स्थल संचालित हैं, जहां कुल 14,578 गौवंश संरक्षित हैं। इतने बड़े स्तर पर पशुओं के लिए नियमित और पर्याप्त चारे की व्यवस्था करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
भूंसा बैंक योजना के तहत किसानों को उनके भूंसे का समय पर भुगतान किया जाएगा, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ भी मिलेगा और गौवंशों के लिए चारे की स्थायी व्यवस्था भी बन सकेगी।
प्रशासन ने यह भी निर्णय लिया है कि जिन गौ आश्रय स्थलों में 100 से कम पशु हैं, ऐसे लगभग 8 स्थलों को बंद किया जाएगा। वहां मौजूद गौवंशों को नजदीकी बड़े गौशालाओं में स्थानांतरित किया जाएगा और इन स्थानों पर भूंसा बैंक विकसित किए जाएंगे।
इसके साथ ही केवल सूखे चारे ही नहीं, बल्कि हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि गौवंशों के पोषण स्तर में सुधार हो सके।
अधिकारियों का मानना है कि यदि किसान इस योजना में सहयोग करें तो न केवल गौवंशों को समय पर चारा मिलेगा, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और जिले की पशु संरक्षण व्यवस्था और मजबूत बनेगी।
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