केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के हालिया नोटिफिकेशन को लेकर देश के शैक्षिक और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। नए नियम के अनुसार, 9वीं कक्षा से छात्रों के लिए तीसरी भाषा की पढ़ाई अनिवार्य की जा रही है, जिसे लेकर तमिलनाडु में विरोध देखने को मिल रहा है।
तमिलनाडु बीजेपी नेता के. अन्नामलाई ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा है कि यह छात्रों पर अनावश्यक शैक्षणिक दबाव बढ़ा सकता है। उनका कहना है कि 9वीं जैसे महत्वपूर्ण कक्षा स्तर पर अचानक तीसरी भाषा जोड़ने से छात्रों पर मानसिक बोझ बढ़ेगा और उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।
फैसले पर क्या आपत्ति है?
अन्नामलाई का कहना है कि कई छात्रों ने 6वीं कक्षा में ही अपनी पसंद की भाषाएं चुन ली होती हैं, ऐसे में 9वीं में फिर से नई भाषा को अनिवार्य करना उनके लिए कठिनाई पैदा कर सकता है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से इस नोटिफिकेशन को वापस लेने की अपील भी की है।
हालांकि यह भी उल्लेखनीय है कि अन्नामलाई ने पहले 6वीं कक्षा से लागू तीन भाषा नीति का समर्थन किया था, लेकिन 9वीं कक्षा में इसे लागू करने के समय पर उन्होंने आपत्ति जताई है।
CBSE का नया नियम क्या है?
CBSE के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से 9वीं कक्षा के छात्रों को तीन भाषाओं (R1, R2, R3) का अध्ययन करना अनिवार्य होगा। इनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी जरूरी होंगी। छात्र तीसरी भाषा के रूप में विदेशी भाषा भी चुन सकते हैं, लेकिन इसके लिए शर्तें लागू रहेंगी।
जो छात्र विदेशी भाषा को पढ़ना चाहते हैं, उन्हें यह विकल्प तीसरी या अतिरिक्त भाषा के रूप में मिलेगा, बशर्ते वे अन्य नियमों का पालन करें।
कहां मिलेगी जानकारी?
CBSE की ओर से इस नई नीति से जुड़ी विस्तृत जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है।
विवाद क्यों बढ़ा?
तमिलनाडु में इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कुछ लोग इसे शिक्षा पर अतिरिक्त बोझ मान रहे हैं, जबकि बोर्ड का कहना है कि इसका उद्देश्य बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना है।
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