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मध्य पूर्व तनाव के बीच राहत के संकेत, Strait of Hormuz को लेकर समझौते की चर्चाएं तेज

मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच United States और Iran के बीच संभावित समझौते की खबरों ने वैश्विक स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच एक प्रारंभिक समझौता ढांचा तैयार किया गया है, जिसके तहत मौजूदा युद्धविराम को लगभग 60 दिनों तक बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अब तक किसी आधिकारिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं।

कूटनीतिक सूत्रों का दावा है कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों पक्ष अंतिम समझौते की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। इसी बीच यह भी कहा जा रहा है कि रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of Hormuz को दोबारा खोले जाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार समुद्री मार्ग से बारूदी सुरंगें हटाने का काम भी किया गया है, ताकि जहाजों की आवाजाही फिर सामान्य हो सके।

समझौते में क्या हो सकती हैं प्रमुख शर्तें?

सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित समझौते में यह शर्त शामिल हो सकती है कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। इसके अलावा संवर्धित यूरेनियम और अन्य परमाणु सामग्री के प्रबंधन को लेकर भी एक तय प्रक्रिया अपनाने पर चर्चा हो रही है।

बताया जा रहा है कि समझौते के लागू होते ही Strait of Hormuz को पूरी तरह खोला जा सकता है। इसके साथ ही क्षेत्र में चल रहे सैन्य अभियानों को रोकने और तनाव कम करने की संयुक्त घोषणा भी संभव मानी जा रही है।

परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़ी चुनौती

हालांकि सबसे बड़ा विवाद अभी भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान स्पष्ट रूप से यह भरोसा दे कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों तक सीमित रहेगा। दूसरी तरफ ईरान का कहना है कि किसी भी संभावित समझौते में उसकी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों का सम्मान जरूरी है।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी हाल ही में बयान दिया था कि किसी संभावित समझौते को लेकर अभी अंतिम स्थिति साफ नहीं है और कई मुद्दों पर बातचीत जारी है।

वैश्विक बाजारों की नजर हॉर्मुज पर

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिने जाने वाले Strait of Hormuz से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई होती है। ऐसे में अगर यह मार्ग पूरी तरह खुलता है तो वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बड़ी राहत मिल सकती है।

फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश वास्तव में स्थायी समझौते तक पहुंच पाते हैं या नहीं।

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