Breaking News

ईरान-अमेरिका तनाव का असर तेल बाजार पर, क्या भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ेंगी?

तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित NATO शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई। ईरान के साथ संघर्षविराम समाप्त होने और क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंकाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली। ऐसे में भारत में भी पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर संभावित असर को लेकर चर्चा बढ़ गई है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी

तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट और WTI क्रूड की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ते हैं तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल और महंगा हो सकता है।

भारत अपनी तेल आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में वैश्विक कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने पर आयात लागत बढ़ सकती है, जिसका असर घरेलू ईंधन कीमतों और परिवहन लागत पर पड़ने की संभावना रहती है।

शेयर बाजार और रुपये पर दबाव

भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने का असर निवेशकों की धारणा पर भी दिखाई देता है। तेल महंगा होने की स्थिति में आयात बिल बढ़ता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव आ सकता है। इसका असर शेयर बाजार के साथ-साथ अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो परिवहन, ऊर्जा और उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इससे खाद्य पदार्थों समेत कई आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ सकता है और महंगाई बढ़ने की संभावना बन सकती है।

क्या तुरंत बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक-दो दिन की तेजी का असर तुरंत खुदरा ईंधन कीमतों पर नहीं पड़ता। यदि कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं या आपूर्ति में बड़ी बाधा आती है, तभी पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में बदलाव की संभावना बढ़ती है।

भारत की तैयारी कितनी मजबूत?

ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भारत ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और वाणिज्यिक स्टॉक तैयार किए हैं, जिससे किसी भी अल्पकालिक आपूर्ति संकट का सामना किया जा सके। सरकार लगातार रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाने और तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाने पर भी काम कर रही है, ताकि वैश्विक संकटों का असर सीमित रखा जा सके।

हालांकि, यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो भारत सहित कई आयातक देशों को महंगे कच्चे तेल और बढ़ती ऊर्जा लागत का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात और तेल बाजार की दिशा पर सभी की नजर बनी रहेगी।

Check Also

संसद में रामलीला के संरक्षण पर मंथन, सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर हुआ जोर

दशहरा उत्सव से पहले संसद भवन में देशभर की रामलीला समितियों के प्रतिनिधियों के साथ …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *