राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस घटनाक्रम पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Pawan Khera ने कहा कि दोनों पदाधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए जाने से उन आरोपों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं, जिनकी चर्चा पिछले कुछ समय से हो रही थी। उन्होंने कहा कि केवल इस्तीफे पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए।
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, क्योंकि वित्तीय पारदर्शिता और ट्रस्ट की संपत्तियों की सुरक्षा सामूहिक दायित्व है। उनके अनुसार यदि किसी भी स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं तो उसकी जवाबदेही केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
कांग्रेस ने यह भी मांग की कि पूरे प्रकरण की जांच Supreme Court of India की निगरानी में किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। पार्टी का कहना है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि सभी तथ्यों को सामने लाया जा सके और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो सके।
पवन खेड़ा ने ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग करते हुए कहा कि देश केवल आंशिक बदलाव नहीं, बल्कि व्यापक जवाबदेही चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट के गठन और उसके संचालन से जुड़े सभी स्तरों की भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए।
इसके अलावा कांग्रेस ने नए महासचिव की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए और कहा कि जिन लोगों पर पहले से आरोप लग रहे हों, उनकी भूमिका की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। पार्टी ने केंद्र और राज्य सरकार की जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की और कहा कि पूरे मामले में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है।
नोट: इस मामले में कांग्रेस ने अपने आरोप और मांगें सार्वजनिक रूप से रखी हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच एजेंसियों के निष्कर्ष आना अभी बाकी है।
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