भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर नई दिल्ली में कई दिनों तक चली उच्चस्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते को अंतिम रूप देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। हालिया बातचीत को द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) का एक प्रतिनिधिमंडल जून के पहले सप्ताह में भारत दौरे पर रहा। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। वार्ता में वस्तुओं के व्यापार, गैर-टैरिफ बाधाओं, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने, व्यापार सुविधा उपायों और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे।
दोनों देशों के अधिकारियों ने बातचीत को सकारात्मक और रचनात्मक बताया। चर्चा के दौरान ऐसे समाधान तलाशने पर जोर दिया गया, जिससे दोनों देशों के कारोबारियों और उद्योगों को लाभ मिल सके तथा निवेश और व्यापार के अवसरों का विस्तार हो।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, वार्ता के दौरान सहयोग और व्यावहारिक दृष्टिकोण देखने को मिला। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि एक मजबूत व्यापार समझौता भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों को नई गति दे सकता है और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इधर, यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका ने दुनिया के कई देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों की समीक्षा तेज कर दी है। अमेरिकी प्रशासन ने कुछ देशों पर श्रम मानकों और आयात नीतियों को लेकर चिंता व्यक्त की है तथा आवश्यक होने पर व्यापारिक कार्रवाई की संभावना भी जताई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता सफल होने पर दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी को नई मजबूती मिल सकती है। फिलहाल दोनों पक्ष आगे की बातचीत के जरिए लंबित मुद्दों पर सहमति बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
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