लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद विवादों में आई व्यावसायिक इमारत के भविष्य पर आज महत्वपूर्ण फैसला होने की संभावना है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की सक्षम प्राधिकारी अदालत में मामले की अंतिम सुनवाई निर्धारित है, जिसमें भवन के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान भवन स्वामियों की ओर से विस्तृत जवाब और आवश्यक दस्तावेज दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया था। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए एक दिन की मोहलत दी और अंतिम सुनवाई की तारीख बुधवार तय की।
एलडीए ने भवन मालिकों को पूर्व में कारण बताओ नोटिस जारी कर निर्माण संबंधी स्पष्टीकरण मांगा था। जांच में सामने आया कि संबंधित भूखंड का मानचित्र वर्ष 2014 में आवासीय भवन के रूप में स्वीकृत किया गया था, जबकि बाद में वहां बेसमेंट से तीसरी मंजिल तक व्यावसायिक उपयोग के लिए निर्माण किए जाने का आरोप है। साथ ही, सेटबैक क्षेत्र में भी निर्माण किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
प्राधिकरण का कहना है कि यह भवन मास्टर प्लान में आवासीय श्रेणी वाले भूखंड पर स्थित है, लेकिन लंबे समय से इसका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। इसी आधार पर निर्माण नियमों के उल्लंघन की जांच की जा रही है।
यह मामला 22 जून को हुई भीषण आग की घटना के बाद चर्चा में आया था। हादसे में 15 बच्चों की दम घुटने से मौत हो गई थी। घटना के बाद भवन की वैधता, निर्माण मानकों और अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठे थे, जिसके बाद एलडीए ने जांच शुरू करते हुए भवन मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ की।
आज होने वाली सुनवाई में यह तय किया जा सकता है कि संबंधित भवन को ध्वस्त किया जाएगा, उसे नियमित (कंपाउंड) करने की अनुमति दी जाएगी या फिर प्राधिकरण किसी अन्य कानूनी कार्रवाई का आदेश देगा। इस फैसले पर पीड़ित परिवारों, स्थानीय लोगों और प्रशासन की निगाहें टिकी हुई हैं।
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