सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को शिवसेना के चुनाव चिन्ह ‘तीर-धनुष’ विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राजनीतिक बयानबाजी को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत के कामकाज को लेकर सार्वजनिक मंचों पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां स्वीकार नहीं की जाएंगी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने शिवसेना (UBT) पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता से कहा कि एक तरफ अदालत से समय मांगा जाता है और दूसरी ओर बाहर यह कहा जाता है कि मामले में फैसला नहीं हो रहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया पर इस तरह की बयानबाजी उचित नहीं है और नेताओं को शब्दों का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए।
पीठ ने यह भी कहा कि अदालत लगातार मामलों की सुनवाई कर रही है और किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव या भ्रम पैदा करने वाली चर्चाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने संकेत दिया कि संवेदनशील मामलों पर राजनीतिक टिप्पणियों से बचना चाहिए।
इस पर संबंधित पक्ष के वकील ने कहा कि वे ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करते और अदालत जब भी अगली तारीख तय करेगी, वे बहस के लिए तैयार रहेंगे। वहीं दूसरे पक्ष की ओर से कहा गया कि उनकी तरफ से हमेशा संयमित रवैया अपनाया गया है और सभी पक्षों को मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
संक्षिप्त सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2026 के लिए तय कर दी। यह विवाद 2022 में शिवसेना में हुए राजनीतिक विभाजन के बाद शुरू हुआ था। बाद में चुनाव आयोग ने पार्टी के मूल चुनाव चिन्ह ‘तीर-धनुष’ को एकनाथ शिंदे गुट को आवंटित कर दिया था, जिसके खिलाफ उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
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