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Nepal और India के बीच बढ़ी कूटनीतिक चर्चा, कैलाश मानसरोवर मार्ग पर विवाद फिर सुर्खियों में

कैलाश मानसरोवर यात्रा के मार्ग को लेकर एक बार फिर भारत और नेपाल के बीच कूटनीतिक तनाव देखने को मिला है। नेपाल की ओर से हाल ही में लिपुलेख क्षेत्र को लेकर आपत्ति जताए जाने के बाद भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि लिपुलेख दर्रा लंबे समय से कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक पारंपरिक और स्थापित मार्ग रहा है। मंत्रालय के अनुसार, इस रास्ते से दशकों से श्रद्धालु यात्रा करते आ रहे हैं और यह कोई नया या हालिया विकसित मार्ग नहीं है।

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि सीमा से जुड़े दावों को लेकर भारत का रुख हमेशा स्पष्ट रहा है। भारत के अनुसार ऐसे दावे ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और इन्हें एकतरफा तरीके से आगे बढ़ाना उचित नहीं है।

साथ ही भारत ने यह भी दोहराया कि वह नेपाल के साथ सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि दोनों देशों को आपसी सहमति और कूटनीतिक संवाद के जरिए लंबित सीमा मामलों का समाधान निकालना चाहिए।

दूसरी ओर, नेपाल ने एक बार फिर दावा किया है कि सुगौली संधि के आधार पर लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र उसके संप्रभु क्षेत्र में आते हैं। नेपाल का कहना है कि उसने इस मुद्दे को भारत और चीन दोनों के सामने उठाया है और इन क्षेत्रों में किसी भी तरह की सड़क, व्यापार या यात्रा गतिविधियों का विरोध करता है।

नेपाल ने यह भी कहा है कि उसने चीन को भी इस संबंध में अपनी स्थिति से अवगत कराया है और लिपुलेख मार्ग को अपने क्षेत्र का हिस्सा बताया है।

इस बीच भारत सरकार ने कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 की तैयारी भी शुरू कर दी है। इस वर्ष यात्रा दो प्रमुख मार्गों—उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथुला दर्रे—से संचालित की जाएगी।

यात्रा के लिए कुल 10-10 बैच निर्धारित किए गए हैं, जिनके जरिए लगभग 1000 श्रद्धालु शामिल होंगे। इनमें आधे यात्री लिपुलेख मार्ग से और बाकी नाथुला मार्ग से यात्रा करेंगे।

लिपुलेख मार्ग से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं का पहला जत्था जुलाई की शुरुआत में दिल्ली से रवाना होने की योजना है। इससे पहले यात्रियों को दिल्ली में मेडिकल जांच, दस्तावेज सत्यापन और यात्रा से जुड़ी ब्रीफिंग जैसी औपचारिक प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।

भारत ने साफ किया है कि वह धार्मिक यात्राओं को सुचारु रूप से जारी रखने के पक्ष में है, लेकिन सीमा विवादों पर अपना रुख ऐतिहासिक तथ्यों और स्थापित स्थिति के आधार पर बनाए रखेगा।

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