नोएडा के सेक्टर-110 स्थित महर्षि आश्रम ट्रस्ट की लगभग 3.36 एकड़ जमीन की बिक्री से जुड़े कथित भूमि घोटाले की जांच तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) ने मामले में नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन के अधिकारियों से पूछताछ कर कई महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी हैं।
जांच को आगे बढ़ाते हुए एसआईटी ने जिलाधिकारी (डीएम) और नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) की संयुक्त टीम बनाकर विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करने और जल्द सौंपने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
पूछताछ के दौरान एसआईटी ने जिला प्रशासन से यह जानना चाहा कि महर्षि आश्रम की भूमि नोएडा प्राधिकरण की अधिसूचित सीमा में होने के बावजूद राजस्व अभिलेखों में अब तक प्राधिकरण का नाम दर्ज क्यों नहीं किया गया। इस पर प्रशासन की ओर से बताया गया कि नामांतरण की प्रक्रिया अभी जारी है।
इसके अलावा एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण से गेझा, भंगेल और सलारपुर गांवों में अधिग्रहीत भूमि से संबंधित रिकॉर्ड, अधिग्रहण प्रक्रिया और लागू नियमों की पूरी जानकारी भी मांगी है। इससे पहले भी इस प्रकरण में प्राधिकरण के अधिकारियों से लखनऊ में पूछताछ की जा चुकी है।
इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कर रहा है। जांच एजेंसी ने पहले की कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। ईडी के अनुसार, ट्रस्ट की जमीन की बिक्री एक सुनियोजित भूमि घोटाले का हिस्सा हो सकती है।
जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2010 में कुछ लोगों ने ट्रस्ट से मिलता-जुलता नाम इस्तेमाल कर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और बैंक खाते तैयार किए। आरोप है कि इन दस्तावेजों के आधार पर जमीन की बिक्री की साजिश रची गई और फर्जी बिक्री विलेख तैयार किए गए।
जांच एजेंसियों के अनुसार, गेझा तिलपताबाद क्षेत्र की इस भूमि का वर्ष 2024-25 के दौरान एक निजी कंपनी को हस्तांतरण किया गया था। अब एसआईटी और ईडी की समानांतर जांच के बीच जिला प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण की संयुक्त रिपोर्ट को इस बहुचर्चित भूमि मामले में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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