अहमदाबाद से लंदन के लिए रवाना हुई एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के दुर्घटनाग्रस्त होने के एक साल बाद भी जांच को लेकर बहस जारी है। अब पायलटों के एक संगठन ने जांच रिपोर्ट में शामिल कुछ तकनीकी तथ्यों पर सवाल उठाते हुए दोबारा परीक्षण की मांग की है।
विवाद का केंद्र विमान में मौजूद इमरजेंसी पावर सिस्टम बना हुआ है। विमान में एक विशेष आपातकालीन उपकरण लगाया जाता है, जो मुख्य सिस्टम के प्रभावित होने की स्थिति में सीमित बिजली और जरूरी नियंत्रण बनाए रखने में मदद करता है। शुरुआती जांच में दावा किया गया था कि ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने के कुछ सेकंड के भीतर यह सिस्टम सक्रिय हो गया था।
हालांकि, बाद में किए गए तकनीकी परीक्षणों में समय अंतर सामने आने का दावा किया गया। इस अंतर के आधार पर सवाल उठाया गया कि क्या विमान में कोई तकनीकी समस्या उड़ान भरने से पहले या रनवे पर गति पकड़ने के दौरान ही शुरू हो चुकी थी।
कुछ विश्लेषकों ने एयरपोर्ट निगरानी फुटेज का हवाला देते हुए यह संभावना भी जताई कि आपातकालीन सिस्टम अपेक्षित समय से पहले सक्रिय दिखाई दे रहा था। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इसके अलावा यह भी कहा गया कि उड़ान रवाना होने से कुछ समय पहले विमान के कुछ सिस्टम से तकनीकी अलर्ट दर्ज हुए थे। ये संदेश बिजली आपूर्ति, नियंत्रण प्रणाली और अन्य तकनीकी हिस्सों से जुड़े बताए गए हैं। घटना के बाद सामने आए बयानों में विमान के अंदर असामान्य आवाज और रोशनी में बदलाव जैसी बातें भी चर्चा में आईं।
अब पायलट संगठन ने मांग की है कि पूरे घटनाक्रम को विमान के आधिकारिक सिमुलेटर पर दोबारा जांचा जाए और प्रक्रिया में स्वतंत्र प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। साथ ही एयरपोर्ट की रिकॉर्डिंग और तकनीकी डेटा की विस्तृत समीक्षा की भी मांग की गई है।
फिलहाल संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मांग पर कोई नया सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर अंतिम तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
Aaina Express
