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कलकत्ता हाईकोर्ट में पोस्ट-पोल हिंसा पर सुनवाई तेज, तोड़फोड़ और बुलडोजर एक्शन पर उठे सवाल

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के मामलों को लेकर दायर याचिकाओं पर गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इन याचिकाओं में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच झड़प, पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ और कथित प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

सुनवाई के दौरान वकीलों की ओर से दावा किया गया कि राज्य के कुछ इलाकों में चुनाव परिणाम आने के बाद तनाव की स्थिति बनी और कई जगहों पर पार्टी कार्यालयों को नुकसान पहुंचाया गया तथा कार्यकर्ताओं पर हमले की घटनाएं सामने आईं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के नाम पर सख्त कदम उठाए गए, जिसे लेकर “बुलडोजर कार्रवाई” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि हालात ऐसे बन रहे हैं जैसे राज्य में सख्त प्रशासनिक कार्रवाई का नया पैटर्न शुरू हो गया हो, जिससे छोटे व्यापारियों और फेरी लगाने वालों की आजीविका प्रभावित हो रही है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रभावित इलाकों में कई लोगों की रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने याचिकाकर्ताओं के आरोपों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए थे।

कोर्ट में यह भी चर्चा हुई कि क्या इस मामले में पहले की किसी चुनाव बाद हिंसा संबंधी जांच प्रक्रिया की तरह कोई विशेष निगरानी समिति बनाई जानी चाहिए। इस पर याचिकाकर्ता पक्ष ने सहमति जताते हुए साथ ही अंतरिम राहत की भी मांग रखी।

हाईकोर्ट में इस पूरे मामले पर सुनवाई जारी है और अदालत ने विभिन्न पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आगे की कार्यवाही पर विचार करने की बात कही है।

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