संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका ने ईरान की गतिविधियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में नियमों के खिलाफ गतिविधियां कर रहा है, जिसमें समुद्र में बाधा डालने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से अवैध तरीके से शुल्क वसूलने जैसे आरोप शामिल हैं।
अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन गतिविधियों से वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा पैदा हो रहा है, क्योंकि होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस ट्रांजिट मार्गों में से एक है।
UN में अमेरिका द्वारा उठाई गई इस पहल को कई देशों का समर्थन मिला। रिपोर्टों के अनुसार लगभग 113 देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में रुख दिखाया, जिसमें ईरान की गतिविधियों पर चिंता जताई गई और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की बात कही गई।
इस मामले में भारत की स्थिति को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों का भी इस पहल को समर्थन मिला बताया गया है, खासकर समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े हितों को देखते हुए। हालांकि भारत आमतौर पर ऐसे मुद्दों पर संतुलित और कूटनीतिक रुख अपनाता है और सीधे टकराव की बजाय बातचीत पर जोर देता है।
इसी बीच पश्चिम एशिया में पहले से चल रहे तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच हालातों को देखते हुए यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है। दोनों देशों के बीच हाल के समय में तनाव और अस्थायी युद्धविराम जैसे हालात रहे हैं, लेकिन एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
फिलहाल UN में यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले समय में इस पर कूटनीतिक बातचीत और बढ़ने की संभावना है।
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