हाल ही में हुए हिंसक श्रमिक आंदोलन के बाद नोएडा प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और औद्योगिक क्षेत्रों में बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए अहम कदम उठाया है। प्रशासन ने सेक्टर-1 से लेकर सेक्टर-69 तक के औद्योगिक क्षेत्रों को चार जोन में विभाजित किया है। इन सभी जोनों की निगरानी के लिए चार जोनल मजिस्ट्रेट और उनके अधीन 19 सेक्टर मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं।
इन अधिकारियों की मुख्य जिम्मेदारी उद्योगों से जुड़े कारोबारियों और श्रमिकों के बीच संवाद बनाए रखना, विवादों को समय रहते सुलझाना और शांति व्यवस्था कायम रखना है। इस व्यवस्था में नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है ताकि प्रशासनिक तालमेल और मजबूत हो सके।
जोन-1:
इस जोन की जिम्मेदारी मुख्य विकास अधिकारी शिवाकांत द्विवेदी को दी गई है। उनके साथ वेद प्रकाश पांडे (डिप्टी कलेक्टर), पुष्पा यादव, मीना भार्गव (जीएम प्लानिंग) और आरपी सिंह (जीएम जल) सेक्टर मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य करेंगे। यह टीम सेक्टर-1 से 6 तक की देखरेख करेगी।
जोन-2:
डीपी सिंह (ओएसडी, नोएडा प्राधिकरण) को जोनल मजिस्ट्रेट बनाया गया है। उनके साथ अरविंद कुमार (ओएसडी), एके अरोड़ा (जीएम), एसपी सिंह (जीएम) और अरविंद कुमार पाठक (डिप्टी कमिश्नर) को सेक्टर-7 से 16 तक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जोन-3:
इस जोन का नेतृत्व अपर जिलाधिकारी बच्चू सिंह कर रहे हैं। उनके साथ चारुल यादव (उप जिलाधिकारी), रामानुज मिश्रा (डिप्टी कमिश्नर), वेद प्रकाश, जय प्रकाश शुक्ल और हेमकांत सिंह सेक्टर-63 से 65 तक की निगरानी करेंगे।
जोन-4:
अभिषेक पाठक (ओएसडी) को जोनल मजिस्ट्रेट बनाया गया है। उनके साथ अरविंद कुमार मिश्रा (नगर मजिस्ट्रेट), विकास कुमार, अनुज कुमार, उमेश, शिखा तिवारी और मनोज कुमार को सेक्टर-57 से 69 तक की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रशासन का मानना है कि इस नई व्यवस्था से औद्योगिक क्षेत्रों में बेहतर समन्वय स्थापित होगा, विवादों की स्थिति में तुरंत समाधान संभव होगा और भविष्य में किसी भी प्रकार की अशांति को रोका जा सकेगा।
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