Uttar Pradesh में Yogi Adityanath सरकार के कार्यकाल के दौरान Gorakhpur क्षेत्र में बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। खासकर रोड कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हुए व्यापक विकास ने इस इलाके की पहचान को पूरी तरह बदल दिया है।
पहले जहां खराब और जर्जर सड़कों के कारण यह क्षेत्र पिछड़ेपन का प्रतीक माना जाता था, वहीं अब यह मजबूत और आधुनिक सड़क नेटवर्क के लिए जाना जा रहा है। साल 2017 के बाद से करीब 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से लगभग 1500 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया गया है। इसके मुकाबले 2017 से पहले पांच वर्षों में सिर्फ 325 करोड़ रुपये खर्च कर 450 किलोमीटर सड़कें बनाई गई थीं।
बेहतर सड़क कनेक्टिविटी ने न सिर्फ आवागमन को आसान बनाया है, बल्कि उद्योग, व्यापार और निवेश के लिए भी नए अवसर खोले हैं। आज गोरखपुर से Lucknow, Varanasi, Nepal और आसपास के जिलों तक फोरलेन सड़क संपर्क उपलब्ध है, जिससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को तेजी मिली है।
लिंक एक्सप्रेसवे बना गेम चेंजर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में गोरखपुर को 91 किलोमीटर लंबे लिंक एक्सप्रेसवे की भी सौगात मिली है। लगभग 7283 करोड़ रुपये की लागत से बना यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर को Azamgarh से जोड़ता है और इसके जरिए राजधानी लखनऊ तक पहुंच और भी आसान हो गई है।
पूरी हुई प्रमुख परियोजनाएं
पिछले वर्षों में कई अहम परियोजनाएं पूरी की गईं, जिनमें गोरखनाथ ओवरब्रिज, बरगदवा-नकहा रेल ओवरब्रिज, खजांची चौराहा फ्लाईओवर और रामगढ़ताल से देवरिया बाईपास तक फोरलेन सड़क का चौड़ीकरण शामिल है। इन परियोजनाओं ने शहर के अंदर और बाहर दोनों जगह ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाया है।
जारी हैं कई बड़ी परियोजनाएं
वर्तमान में भी गोरखपुर में कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। इनमें जंगल कौड़िया-सोनौली फोरलेन मार्ग, टीपीनगर से पैडलेगंज तक सिक्सलेन फ्लाईओवर, नौसढ़-पैडलेगंज सिक्सलेन सड़क और पिपराइच-गोरखपुर मार्ग का चौड़ीकरण जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा राप्ती नदी पर नए पुल और कई रेल ओवरब्रिज भी बनाए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, मजबूत रोड कनेक्टिविटी और लगातार हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास ने गोरखपुर को तेजी से उभरते शहरों की श्रेणी में ला खड़ा किया है, जिससे यहां निवेश और आवासीय मांग दोनों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
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