मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर जारी नवीनतम रैंकिंग में कानपुर की स्थिति चिंताजनक सामने आई है। नवंबर माह की संयुक्त राजस्व और विकास कार्यों की समीक्षा में कानपुर को प्रदेश में 64वां स्थान मिला है। जिले को कुल 10 में से 8.28 अंक प्राप्त हुए हैं, जो प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं।
अक्टूबर के मुकाबले गिरी रैंकिंग
अक्टूबर माह में कानपुर 40वें स्थान पर था, जबकि सितंबर में भी जिला 64वें पायदान पर रहा था। नवंबर में एक बार फिर निचले पायदान पर पहुंचना यह दर्शाता है कि जिला स्तर पर सख्ती के बावजूद कई विभागों में जमीनी स्तर पर कार्यों के क्रियान्वयन में लापरवाही बरती जा रही है। रैंकिंग में आई गिरावट से अधिकारियों की जवाबदेही और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
विकास कार्यों में भी प्रदर्शन कमजोर
सीएम डैशबोर्ड के तहत आंके गए विकास कार्यों में दिव्यांग पेंशन, मातृत्व एवं शिशु-बालिका योजना, ओडीओपी वित्त पोषण, बिजली आपूर्ति, शिक्षा, सड़क निर्माण, सामूहिक विवाह योजना, आवास योजना और जल जीवन मिशन जैसी प्रमुख योजनाएं शामिल हैं।
नवंबर माह में इन योजनाओं के मूल्यांकन में कानपुर को 59वीं रैंक मिली, जबकि अक्टूबर में जिला 18वें स्थान पर था। यह गिरावट विभागीय लापरवाही को साफ तौर पर उजागर करती है।
राजस्व मामलों में स्थिति और भी कमजोर
राजस्व से जुड़े मामलों में जिले का प्रदर्शन सबसे ज्यादा कमजोर रहा। स्मार्ट सिटी मिशन, हाउस टैक्स वसूली, सरकारी कर राजस्व और कुल राजस्व प्राप्ति समेत 68 परियोजनाओं के मूल्यांकन में कानपुर को 63वां स्थान मिला। अक्टूबर में भी जिले की रैंकिंग 62वीं थी, जिससे यह साफ है कि राजस्व संग्रह और प्रशासनिक निगरानी में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है।
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