कर्नाटक में नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच हुए विधान परिषद चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने सात में से पांच सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि बीजेपी को दो सीटें मिलीं। चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक गलियारों में संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर चर्चा तेज हो गई।
विधानसभा सदस्यों द्वारा किए गए मतदान में कुल सात सीटों के लिए आठ उम्मीदवार मैदान में थे। नतीजों में कांग्रेस के सभी प्रमुख उम्मीदवार सफल रहे, जबकि विपक्षी दल जेडीएस को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका।
परिणामों के बाद ऐसी चर्चाएं सामने आईं कि कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया हो सकता है, क्योंकि कांग्रेस को अनुमान से अधिक समर्थन मिला। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर किसी प्रकार की पुष्टि नहीं की गई है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने किसी प्रकार की विशेष राजनीतिक रणनीति नहीं अपनाई थी। उन्होंने कहा कि यह गुप्त मतदान प्रक्रिया थी और ऐसे में बिना तथ्य के निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि मतदान से पहले विधायकों के साथ बैठकें आयोजित की गई थीं, लेकिन उनका उद्देश्य केवल मतदान प्रक्रिया और प्राथमिकता आधारित वोटिंग प्रणाली को समझाना था। उनके अनुसार बड़ी संख्या में पहली बार चुने गए विधायक थे, इसलिए मतपत्र अमान्य होने से बचाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
यह चुनाव इसलिए आयोजित किया गया क्योंकि विधान परिषद के सात सदस्यों का कार्यकाल जून के अंत में पूरा होने वाला था। चुनाव परिणामों को राज्य की राजनीति में सत्ता संतुलन और संगठनात्मक क्षमता के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
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