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विपक्ष के नेता के चयन को लेकर कोर्ट ने उठाए सवाल, स्पीकर से मांगा निर्णय का आधार

कोलकाता:
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। अदालत ने यह जानने की कोशिश की कि एक ही राजनीतिक दल की ओर से अलग-अलग प्रस्ताव मिलने की स्थिति में विधानसभा अध्यक्ष ने किस आधार पर अपना निर्णय लिया।

मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें विपक्ष के नेता के चयन को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पार्टी की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया और किसी अन्य विधायक को विपक्ष का नेता नियुक्त कर दिया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि यदि अध्यक्ष के पास अलग-अलग प्रस्ताव पहुंचे थे, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस प्रक्रिया के तहत अंतिम निर्णय लिया गया। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या किसी प्रकार का बहुमत परीक्षण या अन्य औपचारिक प्रक्रिया अपनाई गई थी।

कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि यदि पार्टी की ओर से पहले प्रस्ताव भेजा जा चुका था और बाद में विवाद सामने आया, तो उस दौरान अध्यक्ष की ओर से क्या कदम उठाए गए और निर्णय किस आधार पर लिया गया।

सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रक्रियात्मक स्पष्टता जरूरी है, खासकर तब जब एक ही दल के भीतर अलग-अलग दावे सामने आए हों।

अदालत ने संकेत दिया कि इस मामले में अध्यक्ष की भूमिका, अधिकारों और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर स्पष्ट जवाब आवश्यक है। अब आगे की सुनवाई में संबंधित पक्षों से विस्तृत स्पष्टीकरण लिया जा सकता है।

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