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Taj Mahal को लेकर छिड़ी चर्चा, ईरानी दूतावास के बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio की हालिया भारत यात्रा के दौरान आगरा स्थित Taj Mahal से सामने आई एक तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। तस्वीर में रूबियो अपनी पत्नी के साथ ताजमहल के सामने दिखाई दिए। इसके बाद भारत में मौजूद ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इस ऐतिहासिक स्मारक और उसके इतिहास को लेकर टिप्पणी की, जिसने बहस को और तेज कर दिया।

दूतावास की ओर से कहा गया कि ताजमहल केवल एक इमारत नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रेम कहानी की निशानी है, जिसका संबंध फारसी संस्कृति और कला से भी जुड़ा रहा है। पोस्ट में यह भी कहा गया कि इस स्मारक के निर्माण में ईरानी मूल के कलाकारों और वास्तुकारों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इसी के साथ अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी नीतियों पर भी कटाक्ष किया गया।

क्या सच में ईरानी मूल से जुड़ी थीं मुमताज महल?

इतिहासकारों के अनुसार, मुमताज महल का वास्तविक नाम अर्जुमंद बानो बेगम था। उनका जन्म 1593 में एक प्रतिष्ठित फारसी मूल के परिवार में हुआ था, जो मुगल दरबार में काफी प्रभावशाली माना जाता था। उनके पिता आसफ खान मुगल शासन में उच्च पद पर थे, जबकि उनका परिवार फारस यानी आज के ईरान से भारत आया था।

मुमताज महल मुगल बादशाह Shah Jahan की सबसे प्रिय बेगमों में गिनी जाती थीं। कहा जाता है कि 1631 में 14वें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई थी। इस घटना से शाहजहां बेहद दुखी हो गए और उन्होंने उनकी याद में एक भव्य मकबरा बनवाने का फैसला किया, जिसे आज दुनिया Taj Mahal के नाम से जानती है।

ताजमहल का निर्माण कैसे हुआ?

इतिहास के मुताबिक ताजमहल का निर्माण 1632 में शुरू हुआ था। मुख्य मकबरा लगभग 1648 तक तैयार हो गया था, जबकि पूरे परिसर को पूरा होने में करीब 1653 तक का समय लगा। माना जाता है कि इसके निर्माण में लगभग 20 हजार कारीगरों और मजदूरों ने काम किया था।

इस स्मारक की वास्तुकला में फारसी, भारतीय और इस्लामिक शैली का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है। कई इतिहासकार उस्ताद अहमद लाहौरी को इसका प्रमुख वास्तुकार मानते हैं।

इतिहास और राजनीति के बीच फिर चर्चा में ताजमहल

रूबियो की तस्वीर और उस पर आई प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर लोग ताजमहल के इतिहास, मुमताज महल की पृष्ठभूमि और मुगलकालीन वास्तुकला को लेकर चर्चा कर रहे हैं। कुछ लोग इसे सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे वर्तमान अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जोड़ रहे हैं।

दुनिया के सात अजूबों में शामिल Taj Mahal आज भी प्रेम, कला और ऐतिहासिक विरासत का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।

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