तेलंगाना से राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए द्विवार्षिक चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी और वेम नरेंद्र रेड्डी को निर्विरोध सदस्य घोषित किया गया है। दोनों उम्मीदवारों के खिलाफ किसी अन्य दल या निर्दलीय प्रत्याशी ने नामांकन नहीं किया, जिसके कारण बिना मतदान के ही उन्हें राज्यसभा के लिए चुन लिया गया।
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि दोनों नेताओं के सामने कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं है। निर्धारित समयसीमा तक किसी अन्य उम्मीदवार के मैदान में न आने के चलते निर्वाचन नियमों के अनुसार दोनों को निर्विरोध विजेता घोषित किया गया।
द्विवार्षिक प्रक्रिया के तहत हुआ चुनाव
राज्यसभा की इन सीटों के लिए चुनाव 2026 के द्विवार्षिक चुनावों के तहत कराया गया था। तेलंगाना विधानसभा में कांग्रेस की संख्या को देखते हुए पार्टी ने अभिषेक मनु सिंघवी और वेम नरेंद्र रेड्डी को उम्मीदवार बनाया था। विपक्ष की ओर से कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतरा, इसलिए मतदान की स्थिति नहीं बनी।
निर्वाचन अधिकारियों ने औपचारिक घोषणा करते हुए बताया कि तय समय सीमा के भीतर किसी अन्य दल या स्वतंत्र उम्मीदवार ने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया।
कांग्रेस में दोनों नेताओं का अहम योगदान
अभिषेक मनु सिंघवी देश के प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वे पहले भी राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं और संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर पार्टी का पक्ष प्रभावी तरीके से रखते रहे हैं।
वहीं वेम नरेंद्र रेड्डी तेलंगाना कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। राज्य की राजनीति और संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। पार्टी नेतृत्व ने उनके योगदान को देखते हुए उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला किया।
राज्यसभा में कांग्रेस को मिलेगा अनुभव का फायदा
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, दोनों नेताओं का निर्विरोध चुना जाना कांग्रेस के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे यह भी जाहिर होता है कि इस बार राज्यसभा चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति में किसी बड़े टकराव की स्थिति नहीं बनी।
दोनों नेताओं के राज्यसभा पहुंचने से कांग्रेस को संसद के उच्च सदन में अपनी आवाज मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। पार्टी का मानना है कि ये दोनों नेता तेलंगाना से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाएंगे और राज्य के हितों की पैरवी करेंगे।
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