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मध्य पूर्व संकट पर मंथन के लिए जुटेंगे विश्व नेता, G7 सम्मेलन में ईरान मुद्दे पर विशेष चर्चा

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े हालात के बीच 16 जून को होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता प्रमुख मुद्दे रहेंगे। सम्मेलन के दौरान पश्चिम एशिया की स्थिति पर एक विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें कई महत्वपूर्ण देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

यह बैठक फ्रांस की मेजबानी में आयोजित की जा रही है। सम्मेलन में G7 सदस्य देशों के नेताओं के अलावा कुछ प्रमुख साझेदार देशों और क्षेत्रीय शक्तियों को भी आमंत्रित किया गया है, ताकि मध्य पूर्व की मौजूदा परिस्थितियों पर व्यापक चर्चा हो सके।

कौन-कौन होंगे शामिल?

G7 समूह के सदस्य देशों में शामिल हैं:

  • France
  • United Kingdom
  • Canada
  • Germany
  • Italy
  • Japan
  • United States

इसके अलावा European Union के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल होंगे। विशेष सत्र के लिए IndiaSaudi ArabiaQatarUnited Arab Emirates और Egypt को भी आमंत्रित किया गया है।

मध्य पूर्व और यूक्रेन पर रहेगा फोकस

सम्मेलन में ईरान से जुड़े हालात, क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चर्चा होने की संभावना है। इसके साथ ही Ukraine में जारी संघर्ष और उससे जुड़े वैश्विक प्रभाव भी एजेंडे में शामिल रहेंगे।

भारत की भूमिका पर विशेष नजर

भारत को सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखा जा रहा है। वैश्विक दक्षिण की आवाज, आर्थिक विकास, बहुपक्षीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। इसी कारण भारत को विभिन्न चर्चाओं और सत्रों में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया गया है।

भारत-फ्रांस संबंधों पर भी होगी चर्चा

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, ऊर्जा और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों के रिश्ते रणनीतिक साझेदारी और आपसी विश्वास पर आधारित माने जाते हैं। “मेक इन इंडिया” और संयुक्त औद्योगिक परियोजनाएं भी द्विपक्षीय सहयोग के महत्वपूर्ण हिस्से बने हुए हैं।

निष्कर्ष

16 जून को होने वाला G7 सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब मध्य पूर्व और यूरोप दोनों क्षेत्रों में भू-राजनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं। ईरान-अमेरिका तनाव, यूक्रेन संघर्ष और वैश्विक आर्थिक स्थिरता जैसे मुद्दों पर विश्व नेताओं की चर्चा आने वाले दिनों की कूटनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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