संस्कृत विश्वविद्यालय की कार्य परिषर और विद्यापरिषद की बैठक हुई संपन्न
संस्कृत विश्वविद्यालय में अब शास्त्री की पढ़ाई तीन की जगह चार साल की होगी। इस बात का निर्णय कार्यपरिषद की बैठक में लिया गया। शास्त्री के छात्र अपना मनपसंद सब्जेक्ट चुन सकेंगे। सत्र 2025-26 में इसे लागू कर दिया जाएगा।
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कुलपति बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विशेषज्ञों की पांच सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई।
योग साधना केंद्र में आयोजित हुई बैठक विश्वविद्यालय के योग साधना केंद्र में कार्यपरिषद और विद्यापरिषद की संयुक्त बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में सभी ने सर्वसम्मति से तय किया कि अब शास्त्री के पाठ्यक्रम तीन की जगह चार वर्ष का होगा । इसमें छात्र भाषा, कौशल विकास प्रशिक्षण, सह पाठ्यक्रम के विषय का भी छात्र अध्ययन करेंगे।
प्रवेश के समय चार स्ट्रीम में चुन सकेंगे सब्जेक्ट कार्यपरिषद की बैठक के बाद कुलपति ने बताया कि छात्र जो शास्त्री में एडमिशन लेंगे वो प्रवेश के समय चार स्ट्रीम में से अपना पसंदीदा विषय चुन सकेंगे। जिसमें एक स्ट्रीम के दो विषय अनिवार्य होंगे। जिन्हें तीन वर्षों तक चेंज नहीं किया जा सकेगा। साथ ही कौशल विकास और सह पाठ्यक्रम एक विषय अनिवार्य होगा।
स्नातक स्तर पर होंगे आठ सेमेस्टर कुलपति ने बताया – नई शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षा प्रणाली सेमेस्टर आधारित होगी। इसमें 8 सेमेस्टर होंगे। दो सेमेस्टर की पढ़ाई में विद्यार्थी को स्नातक सर्टिफिकेट डिप्लोमा, चौथे सेमेस्टर में डिप्लोमा, छठवें सेमेस्टर में डिग्री ग्रेजुएट और आठवें सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी करने पर रिसर्च डिग्री सर्टिफिकेट की उपाधि दी जाएगी। नई शिक्षा नीति के अनुसार हर वर्ष पढ़ाई का विद्यार्थियों को क्रेडिट मिलेगा।
तबादले की नीति पर भी हुआ फैसला इस दौरान संस्कृत विश्वविद्यालय की तबादला नीति को भी स्वीकृति दी गई है। जिसपर अब शासन की संस्तुति का इंतजार है। शासन को यह नीति भेज दी गई है। इस दौरान कार्य परिषद के सदस्य उपस्थित रहे।