बस्ती में छठ पर्व की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन शहर की कुआनो नदी में नालों का गंदा पानी गिरने से इसकी पवित्रता पर सवाल उठ रहे हैं। नदी का जल अब स्नान और पूजा के योग्य नहीं रह गया है, फिर भी श्रद्धालु इसी में खड़े होकर भगवान भास्कर को अर्घ्य देंगे।
पूरे शहर का गंदा पानी सीधे कुआनो नदी में मिल रहा है, जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो गया है। छठ पर्व के लिए घाटों की सजावट और बेदियों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन नदी के पानी की गुणवत्ता एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है।
हर साल की तरह इस बार भी प्रशासनिक उदासीनता स्पष्ट दिख रही है। नगर पालिका से लेकर प्रदूषण नियंत्रण विभाग तक किसी भी जिम्मेदार विभाग ने अब तक इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। छठ घाटों की सफाई भी केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि छठ पर्व स्वच्छता और पवित्रता का प्रतीक है। गंदे पानी में स्नान और अर्घ्यदान करना आस्था के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल नदी में गिरने वाले नालों को रोकने और पानी की सफाई के लिए त्वरित व्यवस्था करने की मांग की है।
छठ पर्व की पवित्रता बनाए रखने के लिए केवल दिखावटी तैयारी नहीं, बल्कि वास्तविक सफाई अभियान चलाना आवश्यक है, ताकि श्रद्धालु बिना किसी संकोच के सूर्य देव को अर्घ्य दे सकें। वर्तमान स्थिति में कुआनो नदी आस्था के बजाय प्रदूषण की कहानी बयां कर रही है।
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