सूर्य की सतह पर हुई एक तीव्र गतिविधि के बाद अंतरिक्ष में निकला विशाल प्लाज्मा बादल अब पृथ्वी के निकट पहुंच रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह सौर घटना पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है, जिसके चलते आने वाले घंटों में भूचुंबकीय तूफान देखने को मिल सकता है।
बताया जा रहा है कि सूर्य के सक्रिय क्षेत्र में हुए विस्फोट के कारण बड़ी मात्रा में ऊर्जा और आवेशित कण अंतरिक्ष में फैले। इन कणों के साथ निकला कोरोनल मास इजेक्शन (CME) तेज गति से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। इसकी अनुमानित रफ्तार लगभग 1400 किलोमीटर प्रति सेकंड बताई गई है।
विशेषज्ञों ने इस घटना को मध्यम से मजबूत श्रेणी का भूचुंबकीय तूफान माना है। ऐसे तूफानों का प्रभाव उपग्रह संचार, जीपीएस सेवाओं, रेडियो सिग्नलों और कुछ क्षेत्रों की विद्युत प्रणालियों पर पड़ सकता है। हालांकि बड़े पैमाने पर नुकसान की आशंका नहीं जताई गई है, लेकिन तकनीकी प्रणालियों पर अस्थायी असर संभव है।
इस खगोलीय घटना का सबसे आकर्षक पहलू अरोरा यानी आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी का दिखाई देना है। पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में प्रवेश करने वाले आवेशित कण जब वायुमंडल की ऊपरी परतों में मौजूद गैसों से टकराते हैं, तब हरे, लाल, गुलाबी और बैंगनी रंग की चमक उत्पन्न होती है। यही दृश्य अरोरा कहलाता है।
भारत में लद्दाख के ऊंचे और कम प्रकाश प्रदूषण वाले इलाकों में इस दुर्लभ नजारे को देखने की संभावना सबसे अधिक है। हान्ले, नुब्रा वैली, पैंगोंग त्सो और कुछ अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में साफ मौसम रहने पर आसमान में हल्की लाल या गुलाबी रोशनी दिखाई दे सकती है। कश्मीर और उत्तराखंड के कुछ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी इसके संकेत मिल सकते हैं।
हालांकि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई जैसे बड़े शहरों में अधिक प्रकाश प्रदूषण और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण अरोरा का दृश्य देख पाना काफी कठिन होगा।
दुनिया के उत्तरी क्षेत्रों जैसे आइसलैंड, स्कॉटलैंड, कनाडा, नॉर्वे, स्वीडन और अमेरिका के उत्तरी राज्यों में यह प्राकृतिक दृश्य अधिक स्पष्ट और रंगीन रूप में दिखाई दे सकता है। वहीं दक्षिणी गोलार्ध के कुछ हिस्सों में भी आसमान रंगों से जगमगा सकता है।
वैज्ञानिक लगातार इस सौर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं। सौर तूफानों की वास्तविक तीव्रता और उनके प्रभाव अंतिम समय तक बदल सकते हैं, इसलिए अरोरा दिखाई देने की संभावना तो है, लेकिन इसकी पूरी तरह पुष्टि नहीं की जा सकती। फिर भी खगोल विज्ञान और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह एक बेहद रोमांचक अवसर माना जा रहा है।
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