लखनऊ स्थित KGMU में यूरोलॉजी विभाग से सामने आए कैंसर दवा घोटाले के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब अस्पताल के सात विभागों में दवाओं की खरीद, उपयोग और मरीजों के रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले जिन तीन विभागों—जनरल सर्जरी, गैस्ट्रो सर्जरी और रेडियोथेरेपी—की जांच शुरू की थी, उनकी पड़ताल लगभग पूरी हो चुकी है। जांच समिति ने इन विभागों से कैंसर मरीजों से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड मांगा था, जिसमें सरकारी योजनाओं के तहत पंजीकृत मरीजों का विवरण भी शामिल है।
जांच के दौरान उन मरीजों के रिकॉर्ड की विशेष रूप से जांच की गई, जिन्हें 5,000 रुपये से अधिक कीमत वाली महंगी कैंसर दवाएं दी गई थीं। इसमें मरीजों के UHID नंबर, उपचार संबंधी दस्तावेज, दवाओं की खरीद और उनके वास्तविक उपयोग का मिलान किया गया।
इसके साथ ही जांच टीम ने कुछ मरीजों से फोन पर संपर्क कर यह भी जानकारी ली कि उन्हें कौन-कौन सी दवाएं दी गईं और इलाज की प्रक्रिया कैसी रही। यह भी देखा जा रहा है कि इलाज शुरू करने से पहले सभी आवश्यक जांचें सही तरीके से की गई थीं या नहीं।
जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि क्या मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के बजाय बाहर से महंगी दवाएं लिखी गईं और सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली सुविधाओं का सही उपयोग हुआ या नहीं।
KGMU प्रशासन के अनुसार, बाकी विभागों की जांच भी तेजी से पूरी की जा रही है। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि तीन विभागों की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट जल्द कुलपति को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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