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सोना और खर्च घटाने की सलाह पर सियासी संग्राम, विपक्ष ने पीएम मोदी को घेरा

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपील पर देश की राजनीति गरमा गई है। प्रधानमंत्री ने लोगों से ईंधन की बचत करने, गैर-जरूरी खर्च कम करने और कुछ समय तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। इसके बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में अपने संबोधनों में कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, कार पूलिंग अपनाने, वर्क फ्रॉम होम और वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा देने की सलाह दी। साथ ही स्कूलों से ऑनलाइन क्लासेस पर भी जोर देने की बात कही।

राहुल गांधी ने बताया सरकार की विफलता

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता से बार-बार त्याग मांगना सरकार की नाकामी को दिखाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की आर्थिक स्थिति को संभालने में सरकार विफल रही है और जिम्मेदारी जनता पर डाली जा रही है।

राहुल गांधी ने कहा कि लोगों को क्या खरीदना है, कितना खर्च करना है और कैसे जीना है, इस तरह की सलाह देना इस बात का संकेत है कि सरकार आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है।

अखिलेश यादव का तंज

समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार को संकट याद आने लगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर इतनी पाबंदियां लगानी पड़ रही हैं तो फिर देश को बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के दावे कैसे पूरे होंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि आम जनता तो पहले से ही महंगाई से परेशान है और सोना खरीदना आम लोगों के लिए आसान नहीं रह गया है।

अरविंद केजरीवाल ने उठाए आर्थिक संकट पर सवाल

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने प्रधानमंत्री की अपील को लेकर चिंता जताई। उन्होंने सवाल किया कि क्या देश किसी बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। केजरीवाल ने कहा कि अगर सरकार नागरिकों से खाने-पीने, घूमने और खरीदारी तक में कटौती की अपील कर रही है, तो उसे देश के सामने आर्थिक हालात की स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

डीएमके और टीएमसी ने भी घेरा

Dravida Munnetra Kazhagam के नेताओं ने पूछा कि आखिर सरकार को ऐसी अपील करने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को देश को बताना चाहिए कि भविष्य में हालात कितने गंभीर हो सकते हैं।

वहीं Mahua Moitra ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक तरफ जनता से ईंधन और खर्च कम करने को कहा जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ राजनीतिक कार्यक्रमों और सरकारी काफिलों में बड़े स्तर पर संसाधनों का इस्तेमाल जारी है।

राजनीतिक बहस तेज

प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद देश में आर्थिक स्थिति, महंगाई और सरकार की नीतियों को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। सत्ता पक्ष इसे वैश्विक संकट के बीच एहतियाती कदम बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे आर्थिक प्रबंधन की कमजोरी से जोड़कर देख रहा है।

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