भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता केटीआर (के. टी. रामा राव) ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और कांग्रेस पार्टी पर जबरदस्त हमला बोला है. एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए केटीआर ने सीएम रेवंत की शिक्षा, उनकी अंग्रेजी बोलने की शैली और राजनीतिक चरित्र पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि अगर पिछले 10 सालों में उनकी पार्टी भी कांग्रेस जैसी राजनीति करती, तो आज कांग्रेस का अस्तित्व भी नहीं बचा होता.
कार्यक्रम में केटीआर ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, ‘हिम्मत है तो BRS पार्टी के मंचों को छूकर देखो.’ उन्होंने कांग्रेस की वर्तमान कार्यप्रणाली पर तंज कसते हुए कहा कि 10 साल पहले अगर BRS ने भी इस तरह की राजनीति की होती, तो क्या कांग्रेस पार्टी आज तक टिकी होती? यह बयान राज्य में बीजेपी और कांग्रेस द्वारा BRS पर किए जा रहे हमलों के बीच केटीआर की ओर से एक मजबूत प्रतिक्रिया मानी जा रही है.
केटीआर पर मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों को दी चेतावनी
BRS नेता ने मुख्यमंत्री पर आइडेंटिटी क्राइसिस (पहचान का संकट) होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि रेवंत रेड्डी इतने असुरक्षित हैं कि उन्होंने एक ऐक्टर को इसलिए जेल में डाल दिया क्योंकि वो उनका नाम भूल गया. केटीआर ने आरोप लगाया कि सीएम का काम केवल जीओ (सरकारी आदेश) जारी करना भर है और वे तभी जीओ देते हैं जब फिल्मी हीरो उनसे मिलने आते हैं.
केटीआर ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और पुलिस अधिकारियों को चेतावनी दी कि वह जो कुछ भी कर रहे हैं, सब याद रखा जाएगा और BRS के सत्ता में वापस आने के बाद उन्हें इसका पछतावा होगा और पार्टी बिना किसी शक के अगले चुनाव फिर से जीतेगी.
हमें बाथरूम साफ करने वाले कहकर मार रहे ताना- केटीआर
सबसे चर्चित बयान केटीआर ने रेवंत रेड्डी की हालिया ‘हार्वर्ड’ यात्रा को लेकर दिया. उन्होंने कहा, ‘हार्वर्ड जाकर पढ़ाई करने के बाद क्या इस तरह की अपमानजनक भाषा बोलना बंद हो जाएगा? यह देखना होगा.’ केटीआर ने सीधे तौर पर रेवंत के अंग्रेजी अहंकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘आप हार्वर्ड जाकर अंग्रेजी में बात कर रहे हैं और हमें बाथरूम साफ करने वाले कहकर ताना मार रहे हैं.’ यह टिप्पणी उस विवाद का संदर्भ है जिसमें कांग्रेस नेताओं द्वारा BRS नेताओं की तुलना झाड़ू लगाने वालों या अन्य सेवाकर्मियों से किए जाने का मामला सामने आया था.
केटीआर के ये बयान तेलंगाना की राजनीति में तल्खी बढ़ा रहे हैं. राज्य में आगामी चुनावों और विधानसभा सत्र को देखते हुए दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार जारी है, जहां शैक्षणिक योग्यता और शब्द चयन भी राजनीति का मुद्दा बन गया है.
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