तेलंगाना में सोमवार (9 फरवरी) को हुए नगर निकाय चुनाव के मतदान के बाद दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। राज्यभर में कुल 73.01 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। खास बात यह रही कि जहां बड़े नगर निगम क्षेत्रों में मतदान अपेक्षाकृत कम रहा, वहीं छोटी नगर पालिकाओं में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
चौतुप्पल में रिकॉर्ड तोड़ मतदान
इस चुनाव में सबसे ज्यादा ध्यान चौतुप्पल नगर पालिका ने खींचा, जहां 91.91 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह आंकड़ा हाल के वर्षों में सबसे ऊंचा माना जा रहा है।
आंकड़ों के अनुसार:
नगर निगम क्षेत्रों में औसत मतदान 66.05 प्रतिशत रहा।
नगर पालिकाओं में औसतन 75.88 प्रतिशत वोटिंग हुई।
निगमों में नालगोंडा ने 77.36 प्रतिशत मतदान के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया।
करीमनगर में सबसे कम मतदान
दूसरी ओर, करीमनगर नगर निगम में केवल 59.12 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो इस चुनाव में सबसे कम रहा। यह अंतर दर्शाता है कि छोटे शहरों और कस्बों में स्थानीय मुद्दों को लेकर मतदाता अधिक सक्रिय नजर आए, जबकि बड़े शहरी क्षेत्रों में मतदान का उत्साह अपेक्षाकृत कम रहा।
स्थानीय राजनीति में बदलती तस्वीर
पिछले कुछ वर्षों में तेलंगाना के स्थानीय चुनावों में मतदाताओं की प्राथमिकताओं में बदलाव देखा गया है। अब लोग पानी, सड़क, सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं जैसे जमीनी मुद्दों को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
बड़े शहरों में कम मतदान को अक्सर “शहरी उदासीनता” कहा जाता है, और करीमनगर इसका उदाहरण बनकर सामने आया है। वहीं, नगर पालिकाओं में रिकॉर्ड मतदान ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींचा है।
शांतिपूर्ण मतदान, अब नतीजों पर नजर
चुनाव आयोग के अनुसार, मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और किसी बड़ी हिंसक घटना की सूचना नहीं मिली। अब सबकी निगाहें मतगणना पर टिकी हैं, जो यह स्पष्ट करेगी कि मतदाताओं का यह उत्साह किस राजनीतिक दल के पक्ष में जाता है।
यह चुनाव तेलंगाना की स्थानीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
Aaina Express
