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दुबई तक फैला 641 करोड़ का साइबर फ्रॉड, दो चार्टर्ड अकाउंटेंटों पर कार्रवाई

देशभर में ऑनलाइन निवेश और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर लोगों को ठगने वाले बड़े साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 28 फरवरी 2026 को दो चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक कुमार शर्मा और भास्कर यादव को PMLA के तहत गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क के माध्यम से लगभग 641 करोड़ रुपये की ठगी की गई और इसे कई माध्यमों से विदेश भेजा गया।

लोगों को फंसाने के तरीके

जांच में पता चला कि नेटवर्क के सदस्य लोगों को आकर्षक निवेश के मौके, पार्ट-टाइम जॉब, QR कोड स्कैम और फिशिंग लिंक के माध्यम से फंसाते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति पैसे भेज देता, वह राशि पहले “फेंक अकाउंट” में जाती—ऐसे बैंक खाते जो किसी और के नाम पर खोले गए होते थे और जिनका संचालन कुछ टेलीग्राम ग्रुप्स के लोग करते थे।

पैसे की विदेश में ट्रांसफर प्रक्रिया

ठगी से आए पैसों को कई डमी और शेल कंपनियों के जरिए घुमाया जाता था ताकि असली स्रोत को छुपाया जा सके। दिल्ली के बिजवासन इलाके में एक ही पते पर 20 से अधिक कंपनियां रजिस्टर्ड पाई गईं। इन कंपनियों के पार्टनर, मोबाइल नंबर, ईमेल और KYC दस्तावेजों में समानताएं थीं।

जांच के अनुसार, इन कंपनियों के जरिए पैसे को भारतीय बैंक के VISA और Master कार्ड से UAE की फिनटेक कंपनी PYYPL के प्रीपेड वॉलेट में ट्रांसफर किया जाता था। वहां से यह रकम ATM और POS मशीनों के जरिए निकाली जाती थी या फिर क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज Binance के माध्यम से डिजिटल एसेट में बदल दी जाती थी। क्रिप्टो वॉलेट की कई परतें बनाकर ट्रेल को छिपाया जाता था, जिससे यह वैध संपत्ति जैसा दिखाई देता था।

आरोपी प्रोफेशनल्स

पूरे नेटवर्क का संचालन पढ़े-लिखे पेशेवरों द्वारा किया जा रहा था, जिनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक कुमार शर्मा, भास्कर यादव, अजय और विपिन यादव शामिल थे।

गिरफ्तारी से पहले की कार्रवाई

साल 2024 में ED ने कई जगहों पर छापेमारी की थी। अशोक कुमार शर्मा छापेमारी के दौरान भाग गया और कथित तौर पर ED अधिकारियों के साथ झड़प भी हुई। भास्कर यादव भी रेड की सूचना पाकर फरार हो गया। दोनों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालतों में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी, लेकिन Delhi हाई कोर्ट ने उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं।

गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई

आखिरकार, भास्कर यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई, जिसे 18 फरवरी 2026 को खारिज कर दिया गया और अदालत ने उसे सरेंडर करने का आदेश दिया। इसके बाद दोनों आरोपी गिरफ्तार किए गए।

अब तक कुल 10 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं और ED ने लगभग 8.67 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अटैच किया है। इस मामले में दो चार्जशीट भी स्पेशल PMLA कोर्ट में दाखिल की जा चुकी हैं। ED की जांच अभी जारी है और भविष्य में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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