पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने एक और बड़ी कार्रवाई की है. ईडी की कोलकाता जोन की टीम ने करीब 57.78 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी को अटैच किया है. ये प्रॉपर्टी पश्चिम बंगाल में सहायक शिक्षक भर्ती घोटाला से जुड़ी बताई जा रही है.
ईडी का कहना है कि इतना पैसा गलत तरीके से भर्ती कराकर कमाया गया और फिर उसे जमीन, फ्लैट्स और विला खरीदने में लगाया गया. जिन लोगों की प्रॉपर्टी अटैच हुई है, उनमें MLA जीवन कृष्ण साहा, प्रसन्न कुमार रॉय और कुछ अन्य शामिल है.
ईडी की जांच में क्या हुआ खुलासा?
ED के मुताबिक, ये प्रॉपर्टी कोलकाता के हाई-वैल्यू इलाकों जैसे राजारहाट, न्यू टाउन, पाथरघाटा, गरगरी और आसपास के कई एरिया में हैं. इसके अलावा, कई जमीनें और मकान मुर्शिदाबाद और पूर्व वर्धमान जिलों में भी पाए गए.
जांच में सामने आया कि सहायक शिक्षक भर्ती में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की गई थी. भर्ती प्रक्रिया चलाने वाली SSC ने OMR शीट्स से लेकर पर्सनैलिटी टेस्ट तक में गड़बड़ी की और पैसे लेकर गलत लोगों को नौकरी दे दी. इसके लिए कई उम्मीदवारों से कैश लिया गया और बाद में उसे कंपनियों और बैंक खातों के जरिए घुमाकर रियल एस्टेट में बदल दिया गया.
शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रसन्न कुमार रॉय सबसे बड़ा नाम
जांच में सबसे बड़ा नाम प्रसन्न कुमार रॉय का सामने आया है, जिसे ईडी ने इस स्कैम का मुख्य बिचौलिया बताया है. ईडी का कहना है कि रॉय और उसके लोगों ने कई उम्मीदवारों से भारी रकम वसूली और बाद में उसी पैसे से प्रॉपर्टी खरीदी गई. कई प्रॉपर्टी उसकी करीबी और पूर्व पत्नी बताई जा रही निलीमा मंगाल के नाम से भी मिली है.
इसके अलावा, TMC के विधायक जीवन कृष्ण साहा की भूमिका भी सामने आई है. वो कथित तौर पर इस पैसे को इकट्ठा कराने और आगे भेजने का काम करते थे. ED ने उन्हें अगस्त 2025 में मुर्शिदाबाद में सर्च के दौरान पकड़ लिया था. उनके और परिवार के नाम पर करीब 3 करोड़ की प्रॉपर्टी मिली है, जिसे ईडी ने अपराध से कमाई गई प्रॉपर्टी (Proceeds of Crime) कहा है.
बंगाल में भर्ती घोटालों में ED ने अब तक जब्त की 698 करोड़ की संपत्ति
इस मामले में ED पहले भी कई अटैचमेंट कर चुकी है. ग्रुप C और D भर्ती घोटाले में 247.2 करोड़, सहायक शिक्षक घोटाले में पहले 238.78 करोड़ और प्राथमिक शिक्षक घोटाले में 154 करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच हुई थी. अब तक की कार्रवाई जोड़कर कुल अटैचमेंट 698 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. ये देश में भर्ती घोटालों से जुड़ा एक बेहद बड़ा आंकड़ा है.
मामले में सुप्रीम कोर्ट दे चुका है बड़ा फैसला
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में बड़ा फैसला दे चुका है. 3 अप्रैल, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने 25,000 से ज्यादा टीचर और नॉन-टीचिंग स्टाफ की नौकरियां रद्द कर दी थी और कहा था कि पूरी भर्ती प्रक्रिया भ्रष्ट और गलत तरीके से चलाई गई थी. इस फैसले के बाद स्कैम की गंभीरता और साफ हो गई थी कि इसमें पैसों का खेल कितना बड़ा था. ईडी ने कहा है कि आगे की जांच अभी जारी है.
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