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यूपी: बिल्डर शैलेन्द्र अग्रवाल पर धोखाधड़ी के दो और मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 92 लाख रुपये के तीन फ्लैटों का सौदा किया गया था, लेकिन निर्माण नहीं कराया गया था।

 

 

आगरा में कोर्ट के आदेश पर थाना हरीपर्वत में बिल्डर शैलेंद्र अग्रवाल सहित 3 के खिलाफ दो और केस दर्ज किए गए हैं। आरोप है कि बिल्डर ने तीन लोगों से निखिल पार्क रॉयल योजना में 3 फ्लैट बुक कर 92 लाख से अधिक रुपये ले लिए। मगर, न तो जमीन खरीदी और न ही फ्लैट का निर्माण कराया। फर्जी नक्शे और दस्तावेज दिखाए। आवंटन पत्र और सेल एग्रीमेंट तक दे दिए। 11 साल से लोग भटकने के लिए मजबूर हैं। मांगने पर रकम भी वापस नहीं की। मामले में धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और षड्यंत्र की धारा लगी है। पुलिस विवेचना कर रही है।

मालवीय कुंज, न्यू राजा मंडी निवासी पुनीत वर्मा ने कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया था। इसमें कहा कि मां मंशा देवी सहकारी आवास समिति लिमिटेड के अध्यक्ष शैलेंद्र अग्रवाल ने प्रमोद गर्ग से ताजगंज स्थित चमरौली में भूमि ली थी। इसमें निखिल पार्क रॉयल के नाम से फ्लैटों को विकसित किया जाना था। निर्माण और विकास कार्य निखिल होम एसोसिएट के पार्टनर को करने थे।

पुलिस ने नहीं सुनी तो कोर्ट पहुंचा पीड़ित

 

पुनीत वर्मा ने बताया कि 23 नवंबर 2012 को शैलेंद्र अग्रवाल, एके पाराशर और प्रमोद गर्ग की बातों में आकर उन्होंने अपने और पत्नी परवीन जुल्का के नाम से ब्लाक बी-3 बीएचके का फ्लैट नंबर 107 बुक करा दिया। इसके 30.95 लाख रुपये अदा किए। आवंटन पत्र और सेल एग्रीमेंट मिल गया। 3 वर्ष में फ्लैट का निर्माण कराकर देने का वादा था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आरोपियों ने लोगों को धोखा दिया। शैलेंद्र अग्रवाल ने कोई जमीन नहीं खरीदी। षड्यंत्र के तहत लोगों का धन हड़प लिया। आरोपियों पर विभिन्न थानों में 55 मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस से शिकायत पर केस दर्ज नहीं किए गए। इस पर कोर्ट में गुहार लगाई।

11 साल पहले कराई थी बुकिंग

 

इसी तरह शमसाबाद रोड स्थित बैंक काॅलोनी निवासी शिवम चावला के साथ धोखाधड़ी की गई। उन्होंने 9 नवंबर 2012 को निखिल पार्क रॉयल योजना के बी ब्लाक में 3 बीएचके का फ्लैट नंबर 604 बुक कराया था। बिल्डर को 31.97 लाख रुपये अदा किए। शिवम ने अपनी बहन नई दिल्ली निवासी रुचि गांधी के नाम से 7 नवंबर 2012 को फ्लैट संख्या 605 बुक किया। इसके 29.23 लाख रुपये अदा किए। मगर, फ्लैटों का निर्माण नहीं कराया गया। रकम भी वापस नहीं की गई।

 

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