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TDI इंफ्रास्ट्रक्चर मनी लॉन्ड्रिंग केस: ED ने उठाया बड़ा कदम, 206 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त

मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में Enforcement Directorate (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रियल एस्टेट कंपनी TDI Infrastructure Limited की करीब 206.40 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कर दी हैं। यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत 6 मार्च 2026 को की गई।

ईडी के अनुसार जिन संपत्तियों को अटैच किया गया है उनमें हरियाणा के Sonipat के कमासपुर इलाके में लगभग 8.3 एकड़ जमीन और कुछ कमर्शियल यूनिट्स शामिल हैं। ये संपत्तियां टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों के नाम पर दर्ज हैं।

दिल्ली पुलिस की FIR के आधार पर शुरू हुई जांच

इस मामले की जांच की शुरुआत Delhi Police और उसकी Economic Offences Wing (EOW) द्वारा दर्ज 26 एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर हुई थी।

आरोप है कि कंपनी, उसके प्रमोटर्स और मैनेजमेंट से जुड़े लोगों ने फ्लैट और प्लॉट देने के नाम पर हजारों होमबायर्स से पैसे लेकर धोखाधड़ी की।

हजारों ग्राहकों से वसूले गए हजारों करोड़ रुपये

जांच में सामने आया कि कंपनी ने सोनीपत में 2005 से 2014 के बीच 23 रिहायशी और कमर्शियल प्रोजेक्ट लॉन्च किए थे। इन प्रोजेक्ट्स के लिए करीब 14,105 ग्राहकों से एडवांस के रूप में लगभग 4619.43 करोड़ रुपये वसूले गए थे।

हालांकि कई प्रोजेक्ट आज तक पूरे नहीं हो सके। चार प्रोजेक्ट्स को अभी तक ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट भी नहीं मिला है, जबकि “पार्क स्ट्रीट” नाम का एक बड़ा प्रोजेक्ट अभी भी अधूरा पड़ा हुआ है।

16–18 साल से इंतजार कर रहे हैं खरीदार

कुछ मामलों में ग्राहकों को 16 से 18 साल तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो फ्लैट मिला और न ही प्लॉट का कब्जा दिया गया।

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि होमबायर्स से लिया गया पैसा प्रोजेक्ट पूरे करने के बजाय अन्य कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया। इसके अलावा इसी पैसे से जमीन खरीदी गई, कंपनी के कर्ज चुकाए गए और अलग-अलग निवेश भी किए गए।

पहले भी हो चुकी है संपत्ति अटैच

ईडी ने बताया कि इससे पहले भी इस मामले में करीब 45.48 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं। ताजा कार्रवाई के बाद इस केस में अब तक कुल 251.88 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं।

जांच एजेंसी का कहना है कि फंड की कथित हेराफेरी की वजह से प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो सके, जिसके कारण हजारों होमबायर्स आज भी अपने घर के कब्जे का इंतजार कर रहे हैं।

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