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अयोध्या में 45 आशा बहुओं का मानदेय रुका, सरकारी अस्पताल से प्रसूताओं को निजी नर्सिंग होम ले जाने पर CMO ने किया सख्त कार्रवाई

 

अयोध्या में सोहावल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर तैनात 45 आशा बहुओं पर गंभीर आरोप लगे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. सुशील कुमार बनियान ने इनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए मानदेय रोकने का आदेश जारी किया है।

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आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में सभी सुविधाएं मौजूद होने के बावजूद ये आशा बहुएं प्रसूताओं को निजी नर्सिंग होम ले जाकर प्रसव कराती थी। इसके बदले मोटी रकम वसूलती थी।

सीएमओ की ओर से की गई जांच में सामने आया कि जून माह में 25 आशा बहुओं ने एक भी प्रसव सरकारी अस्पताल में नहीं कराया। यह लापरवाही और नियमों के उल्लंघन का स्पष्ट मामला माना गया। इस पर सीएमओ ने सीएचसी प्रभारी डॉ. फातिमा हसन रिजवी को निर्देश दिया कि अगस्त माह का मानदेय कुछ आशा बहुओं का रोक दिया जाए।

सरकारी सेवाओं को कमजोर करने का आरोप

​​​​अधिकारियों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए बेहतर सुविधाएं मुफ्त में उपलब्ध हैं। आशा बहुओं की जिम्मेदारी है कि वे गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल तक लाएं और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करें। निजी नर्सिंग होम में प्रसव कराने की प्रवृत्ति न केवल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को कमजोर करती हैं, बल्कि मरीजों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ भी डालती हैं।

कड़ी कार्रवाई की जाएगी

सीएमओ ने चेतावनी दी कि आगे भी अगर कोई आशा बहू इस तरह की गतिविधियों में पाई गई, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आशा बहुएं स्वास्थ्य विभाग का अहम हिस्सा हैं और उन्हें अपने दायित्व का ईमानदारी से पालन करना चाहिए।

विभाग में हड़कंप

कई आशा बहुएं अब सफाई देने में जुटी हैं, जबकि अधिकारी स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं से मरीजों को वंचित करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

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