Breaking News

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर शंकराचार्य का रुख, द्वारका शारदा पीठ ने कही महत्वपूर्ण बातें

शंकराचार्य और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच चल रहे विवाद को लेकर स्वामी सदानंद सरस्वती ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। छिंदवाड़ा प्रवास के दौरान उन्होंने वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक और वैधानिक मुद्दों पर खुलकर विचार रखे और धर्म आधारित शासन व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया।

‘राजनीति का आधार धर्म होना चाहिए’

द्वारका शारदा पीठ के प्रमुख ने कहा कि राजनीति का मूल तत्व ‘नीति’ है, जिसका अर्थ धर्म से है। यदि सत्ता धर्म और सिद्धांतों से भटकती है, तो सामाजिक संतुलन बिगड़ना स्वाभाविक है।

उत्तर प्रदेश में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और सरकार के बीच चल रहे मतभेदों पर उन्होंने कहा कि आस्था से जुड़े विषयों—जैसे गंगा स्नान—पर किसी प्रकार का प्रतिबंध धार्मिक स्वतंत्रता पर आघात है। अखाड़ा परिषद की ओर से लगाए गए ‘दादागिरी’ के आरोपों को उन्होंने अस्वीकार करते हुए कहा कि सिद्धांतों की रक्षा करना संतों का धर्म है और सनातन परंपराओं की रक्षा करना उनका कर्तव्य है।

राष्ट्रनिष्ठा और ‘बौद्धिक आतंकवाद’ पर टिप्पणी

देश में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव और आतंकी घटनाओं पर चिंता जताते हुए शंकराचार्य ने कहा कि राष्ट्र के विरुद्ध गतिविधियां किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकतीं। उन्होंने इसे ‘बौद्धिक आतंकवाद’ की संज्ञा देते हुए कहा कि देश की सुविधाओं का लाभ उठाकर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होना अक्षम्य है।

UGC संशोधन पर कड़ा रुख

केंद्र सरकार द्वारा University Grants Commission (UGC) अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों पर उन्होंने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि संविधान में पहले से ही अपराधों के लिए पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, ऐसे में किसी विशेष वर्ग के लिए अलग नियम बनाना सामाजिक विभाजन को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने सजा के प्रावधानों में समानता की बात कही और प्रस्तावित बदलावों को वापस लेने की मांग की।

गौ-रक्षा पर सकारात्मक टिप्पणी

अपने संबोधन में उन्होंने भोपाल के एक मुस्लिम विधायक द्वारा गौ-हत्या पर रोक लगाने की पहल का स्वागत किया। इसे उन्होंने सामाजिक सद्भाव का सकारात्मक संकेत बताया और कहा कि गौ-रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है।

छिंदवाड़ा दौरा

शंकराचार्य विशेष विमान से छिंदवाड़ा पहुंचे, जहां विभिन्न संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वे सिवनी के लिए रवाना हुए, जहां आश्रम की आधारशिला रखने का कार्यक्रम निर्धारित है।

शंकराचार्य के इस बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

Check Also

PM मोदी करेंगे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्घाटन, 20+ देशों के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी रहेगी

Narendra Modi 19 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित Bharat Mandapam में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *