गोरखपुर विश्वविद्यालय अब केवल पूर्वी उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश में अपनी पहचान बना रहा है। इस बार विश्वविद्यालय में 15 राज्यों के छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लेकर इसे राष्ट्रीय स्तर का शिक्षा केंद्र बना दिया है।
पिछले सत्र में जहां 8 राज्यों के विद्यार्थी ही यहां पढ़ने आए थे, वहीं इस साल यह संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय की लोकप्रियता और भरोसे में बढ़ोतरी हुई है।
इस साल विश्वविद्यालय को भारत के 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से आवेदन मिले। अंतिम प्रवेश सूची में उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, सिक्किम, उत्तराखंड, गुजरात, कर्नाटक, पंजाब, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थियों को स्थान मिला है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, यह सफलता उसके शैक्षणिक सुधारों, नवीन शिक्षण पद्धतियों, और कुलपति प्रो. पूनम टंडन के नेतृत्व में किए गए नवाचारों का परिणाम है। विश्वविद्यालय ने हाल के वर्षों में मूल्यांकन और राष्ट्रीय रैंकिंग्स में भी अच्छा प्रदर्शन किया है।
शोध प्रवेश परीक्षाओं में भी अन्य राज्यों के छात्रों की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2023 में जहां 9 राज्यों के छात्र चुने गए थे, वहीं 2024 में यह बढ़कर 12 राज्यों तक पहुंच गई।
कुलपति प्रो. टंडन ने कहा कि “देश के कोने-कोने से प्रतिभाशाली छात्रों का आना हमारे लिए गर्व की बात है। इससे विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक विविधता और आपसी समझ को बल मिलेगा।”
बाहरी राज्यों से आए छात्र भी विश्वविद्यालय के माहौल से संतुष्ट हैं। मणिपुर के छात्र हेक्टर टेलिन ने कहा कि उन्हें विश्वविद्यालय का वातावरण बहुत अपनापन देता है, जबकि चेनखेई यांबकेम ने कहा कि प्रशासन ने हर समस्या में सहयोग किया।
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