काशी में गंगा नदी का जलस्तर इन दिनों तेजी से घट रहा है, जिसके चलते घाटों पर मिट्टी और सिल्ट की मोटी परत जम गई है। इस स्थिति ने न केवल स्थानीय निवासियों की परेशानी बढ़ाई है, बल्कि श्रद्धालुओं, नाविकों और पुरोहितों के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
हर घाट पर सिल्ट की मोटी परत, आवाजाही ठप
गंगा नदी के जलस्तर में अचानक आई गिरावट के कारण असि घाट पर 5 फीट तक सिल्ट की परत जमा हो गई है। चिकनी मिट्टी के कारण इन घाटों पर चलना मुश्किल हो गया है। श्रद्धालु तो घाट तक पहुंच जाते हैं, लेकिन फिसलन और मिट्टी के कारण नीचे नहीं उतर पा रहे हैं। नावों का संचालन भी पूरी तरह ठप है।
पुरोहित और नाविकों की आजीविका पर संकट
इन घाटों पर पूजा-पाठ करने वाले पुरोहित और पर्यटकों को घुमाने वाले नाविकों की आजीविका पूरी तरह प्रभावित हो रही है। एक स्थानीय पुरोहित ने बताया हम सुबह से इंतजार करते हैं, लेकिन श्रद्धालु आकर लौट जा रहे हैं।
लोग नीचे नहीं उतर पा रहे, तो पूजा कैसे होगी? नाविकों ने भी शिकायत की कि सिल्ट के कारण नावें किनारे नहीं लग पा रहीं उन्होंने बताया कि पर्यटक घाट किनारे आ सके इसको लेकर खुद ही घाट को साफ कर रहे हैं। नगर निगम द्वारा 3-4 पंप लगाकर तत्काल पूरे घाट का सिल्ट साफ कराना चाहिए।
3 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घट रही गंगा
वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से घट रहा है। सुबह 8 तक गंगा का जलस्तर 67.67 मीटर दर्ज किया गया। वही वरुणा में भी जलस्तर कम होने के बाद मोहल्ले में रहने वाले लोगों की परेशानी बन रही है। स्थानीय लोगों को कहना है कि उन्हें बीमारी का खतरा है। कुछ परिवार ऐसे हैं जो अभी भी राहत शिविर में रह रहे हैं वहीं कुछ अपने घर के दूसरे तल पर जगह बनाए हुए।