लखनऊ समेत प्रदेश में बिजली निजीकरण के खिलाफ आज बिजली कर्मी विरोध प्रदर्शन करेंगे। प्रदेश के करीब एक लाख बिजली कर्मचारी सड़कों पर उतरकर सरकार को कड़ी चेतावनी देंगे, वहीं जिलों में परियोजना मुख्यालयों पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के खिलाफ बीते सात महीनों से चल रहे संघर्ष को अब राष्ट्रीय समर्थन मिलने लगा है। नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर देश के 27 लाख से अधिक बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता इस आंदोलन में भाग लेंगे।
निजीकरण के खिलाफ राष्ट्रीय आंदोलन ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि अगर सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया, तो यह आंदोलन एक बड़े राष्ट्रीय आंदोलन में तब्दील हो सकता है। इसके साथ ही, 9 जुलाई को भारत सरकार और राज्य सरकारों की निजीकरण नीतियों के विरोध में एक दिन की राष्ट्रव्यापी सांकेतिक हड़ताल का ऐलान भी किया गया है, जिसकी प्रमुख मांग यूपी में बिजली निजीकरण की प्रक्रिया को निरस्त करना है।
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